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इसके बाद एक
इसके बाद एक दुर्गन्ध जसे आने लगा और अंतिम प्रेत योनि ने अपना विवरण शुरू किया। उसने कहा हे महाराज मेरा गलती बहुत ही असहनीय है। मै इस
प्रेत योनि से पहले एक कवी था एक लेखक हुआ करता था। मेरे जनम के बाद मेरे माता पिता भी मुझे पड़ा लिखा कर अपना जिंदगी जीने के लिए छोड़ दि
या था इस समाज को सेवा करने के लिए। मै लेखक बना कविता और प्रबंध की रचना कीया, जिससे मै समाज को इर्षा, द्वेष, परचर्चा, परनिंदा करना शि
खाया, मैंने योंन सम्बन्धी अति मनोरंजन कहानी भी पड़ोसा, जिससे समाज में फ़ैल गयी,
मगर समाज को एक गलत दिशा की और प्रेरित किया। मेरे किताव पडके लोग हमेशा भ्रमित ही हुआ जिसके कारण समाज में अराजकता फ़ैल गयी, घर घ
र में निंदा चुगली का खेल शुरू हो गया, एक दुसरे को गिराने में आनंद लेता था, बेटे माँ बाप को अपमान करके खुस हुआ करता था। गाँव में, शहर में बहन बे
टियों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं था। जैसे कलियुग का प्रभाव पड़ गया। मैंने एक अच्छा समाज का निर्माण कर सकता था मेरे लेख के द्वारा मगर मेरे लेख ने समा
ज को गलत दिशा की और भेज के कुसंसरित कर डाला। इन सब प्रेत योनियों का जो सब मेरे पहले वर्णन किया सायद इन सबका उद्धार तो हो सकता है मगर मे
रा उद्धार किसी हालत में संभव नहीं। और इसीलिए मेरा शरीर छोरने के बाद धरती माता मुझे भी स्वीकार नहीं किया, ये चार जन तो प्रेत योनि को प्राप्त हुआ म
गर मई शैतान की योनि को प्राप्त हुआ हूँ और इसीलिए मेरे शारीर से दुर्गन्ध आ रहा है। ये दुर्गन्ध मेरे शारीर का है।
इसके बाद उस ऋषि ने कहा अब तुमलोग सब मिलके बातो मै ऐसा काया करूँ जो तुमे लाभ पोहुछे और तुम इस प्रेत योनि से मुक्त हो सके। तब उन्होंने क
हा हे ऋषिवर हमसबका उद्धार तब हो पायेगा जब आप संसार में जाकर हमारा ये कहानी लोगो से कहेंगे, जब लोग हमारा बातो को शुनेगे और हमें घ्रीना करेंगे और साथ ही आपना कल्याण के लिए अपना अपना स्वधर्म का पाल
न करेंगे वेद और शास्त्रों के अनुसार जिसके कारण एक सुसंस्कृत समाज का निर्माण होगा, तब जाके हम लोगो का उद्धार होगा। इसीलिए हे मुनिवर आप कृपा करके हमारा ये दास्ताँ समाज जाकर कहिये।
इसके बाद एक दुर्गन्ध जसे आने लगा और अंतिम प्रेत योनि ने अपना विवरण शुरू किया। उसने कहा हे महाराज मेरा गलती बहुत ही असहनीय है। मै इस
प्रेत योनि से पहले एक कवी था एक लेखक हुआ करता था। मेरे जनम के बाद मेरे माता पिता भी मुझे पड़ा लिखा कर अपना जिंदगी जीने के लिए छोड़ दि
या था इस समाज को सेवा करने के लिए। मै लेखक बना कविता और प्रबंध की रचना कीया, जिससे मै समाज को इर्षा, द्वेष, परचर्चा, परनिंदा करना शि
खाया, मैंने योंन सम्बन्धी अति मनोरंजन कहानी भी पड़ोसा, जिससे समाज में फ़ैल गयी,
मगर समाज को एक गलत दिशा की और प्रेरित किया। मेरे किताव पडके लोग हमेशा भ्रमित ही हुआ जिसके कारण समाज में अराजकता फ़ैल गयी, घर घ
र में निंदा चुगली का खेल शुरू हो गया, एक दुसरे को गिराने में आनंद लेता था, बेटे माँ बाप को अपमान करके खुस हुआ करता था। गाँव में, शहर में बहन बे
टियों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं था। जैसे कलियुग का प्रभाव पड़ गया। मैंने एक अच्छा समाज का निर्माण कर सकता था मेरे लेख के द्वारा मगर मेरे लेख ने समा
ज को गलत दिशा की और भेज के कुसंसरित कर डाला। इन सब प्रेत योनियों का जो सब मेरे पहले वर्णन किया सायद इन सबका उद्धार तो हो सकता है मगर मे
रा उद्धार किसी हालत में संभव नहीं। और इसीलिए मेरा शरीर छोरने के बाद धरती माता मुझे भी स्वीकार नहीं किया, ये चार जन तो प्रेत योनि को प्राप्त हुआ म
गर मई शैतान की योनि को प्राप्त हुआ हूँ और इसीलिए मेरे शारीर से दुर्गन्ध आ रहा है। ये दुर्गन्ध मेरे शारीर का है।
इसके बाद उस ऋषि ने कहा अब तुमलोग सब मिलके बातो मै ऐसा काया करूँ जो तुमे लाभ पोहुछे और तुम इस प्रेत योनि से मुक्त हो सके। तब उन्होंने क
हा हे ऋषिवर हमसबका उद्धार तब हो पायेगा जब आप संसार में जाकर हमारा ये कहानी लोगो से कहेंगे, जब लोग हमारा बातो को शुनेगे और हमें घ्रीना करेंगे और साथ ही आपना कल्याण के लिए अपना अपना स्वधर्म का पाल
न करेंगे वेद और शास्त्रों के अनुसार जिसके कारण एक सुसंस्कृत समाज का निर्माण होगा, तब जाके हम लोगो का उद्धार होगा। इसीलिए हे मुनिवर आप कृपा करके हमारा ये दास्ताँ समाज जाकर कहिये।





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