Monday, 11 March 2019

पिता की मृत्यु का बदला चूका लेंगे या तो कल हम शत्रुओं को नष्ट

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इसके बाद यहाँ इपब सबसे पहले स्टार्ट मेनू में जाकर कमांड खोडोज स्टार्टअप के दौ

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कर शरण के लिए भागी, पर कहीं भी उसे

कर शरण के लिए भागी, पर कहीं भी उसे 



पृथु एक सूर्यवंशी राजा थे, जो वेन के पुत्र थे। वाल्मीकि रामायण में इन्हें अनरण्य का पुत्र तथा त्रिशंकु का पिता कहा गया है। ये भगवान विष्णु के अंशा

वतार थे। स्वयंभुव मनु के वंशज अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की मानसी पुत्री सुनीथा से हुआ था। वेन उनका पुत्र हुआ। सिंहासन पर बैठते ही उस

ने यज्ञ-कर्मादि बंद कर दिये। त्र+षियों ने मंत्रपूत कुशों से उसे मार डाला। सुनिथा ने पुत्र का शव सुरक्षित रखा, जिसकी दाहिनी जंघा का मंथन करके त्र+षियों

 ने एक नाटा और छोटा मुखवाला पुरुष उत्पन्न किया। उसने ब्राह्मणों से पूछा, कि ``मैं क्या करूं?'' ब्राह्मणों ने ``निषीद'' (बैठ) कहा। इसलिए उ

सका नाम निषाद पड़ा। उस निषाद द्वारा वेन के सारे पाप कट गये। बाद में ब्राह्मणों ने वेन की भुजाओं का मंथन किया, जिसके फलस्वरूप स्त्री-पुरुष

 का जोड़ा प्रकट हुआ। पुरुष का नाम पृथु तथा स्त्री का नाम अर्चि हुआ। अर्चि पृथु की पत्नी हुई। यह लक्ष्मी का अवतार थी। पृथु का राज्याभिषेक हुआ।

वेन के पापाचरणों से पृथ्वी धन-धान्यहीन हो गई थी। प्रजा का क्लेश मिटाने के लिए पृ

थु अपना अजगर लेकर पृथ्वी के पीछे पड़े तो वह कांप उठी और गौ-रूप धारण रक्षा नहीं मिली। उसने राजा से प्रार्थना की कि वह अपने उदर में पचे धन-

धान्य को दूध के रूप में दे देगी, बशर्ते कि एक बछड़ा दें। 6स्वायंभुव मनु को बछड़ा बनाकर पृथ्वी दुही गयी। अंत में राजा ने पृथ्वी को कन्या-रूप में ग्रहण किया। पृथु बड़े धर्मात्मा एवं भगवद्भक्त थे। इन्होंने ब्रह्मा

वर्त प्रदेश में पुण्यतोया सरस्वती के तट पर सौ यज्ञ किये। सौवां यज्ञ चलते समय ईर्ष्यालु इंद्र ने इनका अश्व चुरा लिया तो ये कुपित हों गये और धनुष पर अ

पना बाण चढ़ा लिया। त्र+षियों के मना करने पर भी वे इंद्र को होम करने लगे तो ब्रह्मा ने उन्हें रोका। इस पर धर्मात्मा पृथु ने अपना यज्ञ ही रोक लिया। पृथु ने प्रयाग को निवासभूमि बना लिया। स्वयं सनकादि इनके यहां उपस्थित हुए।


Saturday, 9 March 2019

और किसी पन्ने

और किसी पन्ने 


प की बैटरी से परेशान है, फुल बैटरी चार्ज हो जाने के बाद भी लैपटॉप ज्‍यादा बैटरी बैकप देता है या फिर बार बार बीच में ही लॅपटॉप शटडाउन हो जाता


 है। इस तरह की दिक्‍कते आपमें से कई लोगों के लैपटॉप में आतीं होंगी। लैपटॉप में आने वालीं इन दिक्‍कतों को दूर करने के लिए हम आपके लिए कुछ

 टिप्‍स लाए हैं। इसके लिएटार्ट बटन में जाकर कंट्रोल पैनल ऑप्‍शन चुनें और पॉवर ऑप्‍शन पर क्लिक करें। पॉवर ऑप्‍शन में जाकर मॉनि'टर सेक्‍शन

में टर्न ऑफर ऑप्‍शन दिया गया होगा। टर्न ऑफ ऑप्‍शन में जाने के बाद आ'vपके सामने कई दूसरे विकल्‍प :'आएंगे जिनकी मदद से आप अपने लैपटॉ,

प की स्‍क्रीन के पॉवर ऑप्‍शन को सेट कर सकते हैं। जैसे अक्‍सर लैपटॉप ऑन करके हम कभी कभी फोन पर बात करने लगते हैं, या फिर कभी कभी का

म करते करते सो जाते हैं। ऑप्‍शन में जाकर आप अपनविधा अनुसार टाइम सेट कर सकत 1 मिनट, 30 सेकेंड बेहतर होगा टाइम कम ही रखें इससे

आपका लैपटॉप ज्‍यादा बैटरी बैकप देगा। इसके पॉवर सेटिंग में ही आपके सामने दो और ऑप्‍शन दिखेंगे पहला टर्न ऑफ हार्डडिस्‍क और सिस्‍टम स्‍टैं

डबायॅ जिसे सेट करने के लिए एडवांस ऑप्‍शन में" ऑप्‍शन चसे पहले आप अपना पेन ड्राइव कंप्यूटर में लगायर आप फिर आप देखें की आपका पेनड्राइव फॉर्मे

ट करने के बाद वही क्रिया करने को कह रहा है तो फिर आप अपना कमांड प्रांप्ट खोलआपको किसी USB ड्राइव को रिपेयर करने की जानकारी दे रहा हूँ

जिससे आप भी अपने किसी पेनड्राइव को रिपेयर करके दोबारा उसे उपयोग में ले सकते हैं किसी करप्ट पेनड्राइव को अगर आप कंप्यूटर में लगाने की कोशिश

Friday, 8 March 2019

और केसरी

और केसरी



मान जी का जन्म त्रेता युग मे अंजना(एक नारी वानर) के पुत्र के रूप मे हुआ था। अंजना असल मे पुन्जिकस्थला नाम की एक अप्सरा थीं, मगर एक शा

प के कारण उन्हें नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा। उस शाप का प्रभाव शिव के अन्श को जन्म देने के बाद ही समाप्त होना था। अंजना केसरी की पत्नी थीं। केसरी एक शक्तिशाली वानर थे जिन्होने एक बार

 एक भयंकर हाथी को मारा था। उस हाथी ने कई बार असहाय साधु-संतों को विभिन्न प्रकार से कष्ट पँहुचाया था। तभी से उनका नाम केसरी पड गया, "केसरी" का अर्थ होता है सिंह। उन्हे "कुंजर सुदान"(हाथी को मा

रने वाला) के नाम से भी जाना जाता है।संक्षिप्त हनुमान कथा

केसरी के संग मे अंजना ने भगवान शिव कि बहुत कठोर तपस्या की जिसके फ़लस्वरू
प अंजना ने हनुमान(शिव के अन्श) को जन्म दिया।

जिस समय अंजना शिव की आराधना कर रहीं थीं उसी समय अयोध्या-नरेश दशरथ, पुत्र प्राप्ति के लिये पुत्र कामना यज्ञ करवा रहे थे। फ़लस्वरूप उन्हे


 एक दिव्य फल प्राप्त हुआ जिसे उनकी रानियों ने बराबर हिस्सों मे बाँटकर ग्रहण किया। इसी के फ़लस्वरूप उन्हे राम, लषन, भरत और शत्रुघन पुत्र रूप मे प्राप्त हुए।

विधि का विधान ही क

हेंगे कि उस दिव्य फ़ल का छोटा सा टुकडा एक चील काट के ले गई और उसी वन के ऊपर से उडते हुए(जहाँ अंजना और केसरी तपस्या कर रहे थे) ची


ल के मुँह से वो टुकडा नीचे गिर गया। उस टुकडे को पवन देव ने अपने प्रभाव से याचक ब

नी हुई अंजना के हाथों मे गिरा दिया। ईश्वर का वरदान समझकर अंजना ने उसे ग्रहण कर लिया जिसके फ़लस्वरूप उन्होंने पुत्र के रूप मे हनुमान को जन्म दिया।

अंजना के पुत्र होने के कारण ही हनुमान जी को अंजनेय नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है 'अंजना द्वारा उत्पन्न'।

Thursday, 7 March 2019

कपूर और लौंग

कपूर और लौंग



न्दू धर्म में भूतों से बचने के अनेकों उपाय बताए गए हैं। पहला धार्मिक उपाय यह कि गले में ॐ या रुद्राक्ष का लाकेट पहने, सदा हनुमानजी का स्मरण करें। च

तुर्थी, तेरस, चौदस और अमावस्य को पवि‍त्रता का पालन करें। शराब न पीएं और न ही


मांस का सेवन करें। सिर पर चंदन का तिलक लगाएं। हाथ में मौली (नाड़ा) अवश्य बांधकर रखें।

घर में रात्रि को भोजन पश्चात सोने से पूर्व चांदी की कटोरी में देवस्थान पर कपूर और

लौंग जला दें। इससे आकस्मिक, दैहिक, दैविक एवं भौतिक संकटों से मुक्त मिलती है।

प्रेत बाधा दूर करने के लिए पुष्य नक्षत्र में धतूरे का पौधा जड़ सहित उखाड़कर उसे ऐसा

धरती में दबाएं कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे और पूरा पौधा धरती में समा जाए। इस उपाय से घर में प्रेतबाधा नहीं रहती।

प्रेत बाधा निवारक हनुमत मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षणी-पूतना-मारी-महामा

री, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय

 शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा। इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से भूत कभी भी निकट नहीं आ सकते।

हनुमान जी के बाद मां कालका के स्मरण मात्र से किसी भी प्रकार की भूतबाधा है तो तत्काल


 ही हट जाती है। मां काली के कालिका पुराण में कई मंत्रों का उल्लेख मिलता है।

सरसों के तेल का या शुद्ध घी का दिया जलाकर काजल बना लें। ये काजल लगाने से भूत, प्रेत, पिशाच आदि से रक्षा होती है और बुरी नजर से भी रक्षा होती है।

चरक संहिता में प्रेत बाधा

से पीड़ित रोगी के निदान के उपाय विस्तार से मिलते हैं। ज्योतिष साहित्य के मूल ग्रंथों- प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी

आदि में ज्योतिषीय योग हैं जो प्रेत पीड़ा, पितृदोष आदि बाधाओं से मुक्ति का उपाय बताते हैं। अथर्ववेद में दुष्ट आत्माओं को भगाने से संबंधित अनेक उपायों का वर्णन मिलता है।

Tuesday, 5 March 2019

लाल जी को कुछ नहीं



लाल जी को कुछ नहीं 




सूझा उन्होंने उसे दारू देकर विदा कर दिया। और अब उन्होंने कई जगह जाकर कई ओझा तांत्रिक ढूंढे ताबीज वगेरह बनवाई ताकि वो पहलवान परेशान न कर सके। मगर

इन सबका कोई ओचित्य नहीं था। क्योकि उसे तो सिर्फ लाल जी से दारू चाहिए थी न की लाल जी को कोई नुक्सान पहुँचाना था। दुआ ताबीज के बावजूद

कहीं न कहीं से खबर आती की फला गाँव में फला फला आदमी को किसी ने पकड़ लिया है और वो लाल जी को बुला रहा है।

लाल जी तुरंत समझ जाते और अनमने मन से वहां लोगो के आग्रह पर चले जाते। चार गाली उसको देते

चार गाली खुद को और अपने आलस्य को। अगर वो उन दिनों अर्थान पर जाकर भोग देते तो शायद ये मुसीबत कभी उनके पीछे न लगती। कभी बरसात, कभी जल

ती धूप, कभी रात, कभी सुबह, कभी कहीं तो कभी कही से कोई आ जाता के लाल जी चलो दारू देके उसको बचा लो। उन्हें अपना काम छोड़ कर भी जाना पड़ जाता

। लाल जी को ये सब करते हुए करीब एक साल बीत चुका था। अभी तक उन्हें कोई काबिल जानकार नहीं मिला था की वो अपना पीछा छुड़ा पाते, जो मिले भी उन्होंने हाथ डालने से मना कर दिया।

एक बार कहीं से एक जोगी घूमता फिरता न जाने कहाँ से उस गाँव में आ गया। उसने लाल जी के घ

र का पता पूछा। और लाल जी के घर पहुँच गया। लाल जी ने जब एक अनजान आदमी को दे

खा तो वो तुरंत तैयार हो गए की फिर से उसी ने किसी को पकड़ा होगा जिससे ये जोगी बुलाने आया है।

"लाल जी आपसे एक बात करनी है। क्या आप मेरे साथ थोड़ी देर के लिए बाहर आएंगे ?" जोगी ने लाल जी से कहा। लाल जी को उनके बड़े भाई को भी थोड़ी हैरा

नी हुयी के बुलाने नहीं आय सिर्फ बात करने आये हैं। जोगी लाल जी को एक किनारे ले गए।

"मैंने एक पहलवान जेसे आदमी को वहां रेल की पटरी पर देखा है वो मर चुका है। उसने मुझे तुम तक ये सन्देश देने को कहा है की तुम उसे दारू पिलाओ एक निश्चि

त समय अंतराल पर। क्या तुम जानते हो उसे?" जोगी ने लाल जी से कहा।

इतना कहना की लाल जी ने सारी अपनी व्यथा जोगी को सुना दी और कहा की" शायद ये मेरी भाग्य ही है जो मुझे अपने आलस्य की सज़ा इस कदर मिल रही है।"


उसके प्रिये जो

उसके प्रिये जो 



महीने बाद लाल जी के ही गाँव में शोर हुआ की "पहलवान ने किसी को पकड़ लिया है। बेचारा जिन्दगी से बहुत परेशान था और अब मरने के बाद लोगो को परेशान कर रहा

जिसको पहलवान ने पकड़ा था वो आदमी गाँव के एक चौक पर जा बैठा था। और लोग उसे घेर कर खड़े थे। जब उससे पूछा गया की क्या चाहिए तो उसने साफ़

 साफ़ कह दिया के "लाल जी से कह दो दारू पिला दें में चला जाऊंगा।" सब इस बात को जान चुके थे की वो लाल जी के हाथो से दारू क्यों पीना चाहता ह

 आखिर लाल जी उसके प्रिये जो हो चुके थे। सब उसे पकड़ कर वहीँ अर्थान पर ले जाने की कोशिश करने लगे तो उसने पहलवानी करनी शुरू कर दी। एक व्यक्ति को एक तरफ फेंका तो दुसरे को दूसरी तरफ औ

वापस चौक पर पलथी मर कर बैठ गया और कहने लगा "जब तक लाल जी के हाथ से दारू नहीं पी लेता में नहीं जाऊंगा।"

उसकी पहलवानी देख कर किसी की फिर हिम्मत न हुयी की वो उसे पकड़ते। अब शेष सिर्फ एक ही मार्ग था की लाल जी को बुलाया जाए। सबने जाकर लाल

 जी को बुलाया और लाल जी इस बार तुरंत तैयार हो गए शायद उन्हें कुछ प्रश्नों के उत्तर चाहिए थे।
वो तुरंत जाकर वहां पहुँच गए वो पहलवान उन्हें देख कर इसे खुश हुआ जैसे किसी अपने से वर्षों बाद मिल रहा हो।

"लाल जी आओ, देखो ये लोग मुझे मरने आ रहे थे।" उसने अपना झूठा सा दर्द बयाँ कर लाल जी की सांत्वना पानी चाहि।

"क्यों परेशान कर रहे हो? दारू लेनी है तो और किसी से भी ले लो मुझे क्यों पीड़ित कर रखा है?" लाल जी ने अपने दर्द की वजह उसी को बताते हुए अपना दर्द बयां कर दिया।

"नहीं, तुम्हारे हाथो से मुझे तृप्ति मिलती है।" उसने कहा। तब तक लाल जी ने चोटिल उन दोनों व्यक्तियों को देखा।

"क्यों मारा इन लोगों को? पहलवानी करनी है तो जाकर अखाड़े में करो।" लाल जी ने चोटिल उन लोगो की तरफ से कहा।


Saturday, 2 March 2019

रहने का साहस किया

रहने का साहस किया


कभी यह स्थान बहुत खूबसूरत हुआ करता था लेकिन आज इसे शैतानी रूहों ने अपने कब्जे में ले लिया है. य

ह आत्माएं इतनी खतरनाक और दुष्ट हैं कि दिन ढलते ही जो भी व्यक्ति अपनी मौजूदगी यहां दर्ज करवाता है उसे वह अपना शिकार बना लेती हैं.

बहुत से लोग हैं जिन्हें आत्माओं, पारलौकिक शक्तियों और शैतानी ताकतों जैसी किसी भी ची

ज पर विश्वास नहीं होता, वह ऐसी बातों को मनगढंत मानकर झुठला देते हैं लेकिन यह भी सच है कि किसी के झुठलाने से या टाल देने से सच नहीं बदलता.

भोपाल के शिवपुरी में स्थित 2100 साल पुराना किला एक जमाने पहले बेहद खुशनुमा हुआ करता था. लेकिन अब यहां रात तो क्या दिन में कोई आने का साहस नहीं

करता. लोगों का कहना है कि यहां रात के समय घुंघुरुओं की आवाजें आती हैं जो दूर-दूर तक लोगों को सुनाई देती हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन ढलते ही यहां महफिल जमती है जिसमें प्रेत-आत्माएं शामिल होती हैं और जिन-जिन लोगों ने उस महफिल को देखा उनकी तुरंत ही मौत हो गई.

भोपाल के शिवपुरी में एक छोटा सा कस्बा है पोहरी, जहां यह किला स्थित है. इस स्थान के बारे में कोई नहीं जानता लेकिन जब से मीडिया में यहां होने वाली सं

देहास्पद घटनाओं को प्रचारित किया गया है तभी से लोगों को यह समझ आने लगा है कि यहां कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है.

वे लोग जो भूत-प्रेत और आत्माओं के होने जैसी बातों पर यकीन नहीं करते अब तो वो भी इस किले को श्रापित समझने लगे हैं. इस  नहीं है.

पाने के कारण

पाने के कारण 



हुत से ऐसे लोग हैं जो यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने रूहों को देखा है, लेकिन जिन लोगों का सामना कभी किसी मृत आत्मा या भटकती रूह से नहीं हुआ

 उनके लिए यह सब बचकानी और मनगढ़ंत बातें भी हैं. इसमें गलती उनकी नहीं जो रूहों के होने को नकारते हैं लेकिन कहते हैं ना सच तो सच होता है उ

से किसी के स्वीकार करने या नकार देने से फर्क नहीं पड़ता. और सच यही है कि मरने के बाद अतृप्त और असंतुष्ट आत्माएं इंसानी दुनिया में वापस आती हैं औ

र उनके इस दखल से जीते-जागते लोग तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही वह मरने के बाद भी अगर उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो वह खुद भी परेशान रहती हैं.

आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताएंगे जहां मुर्दे चलते हैं और मृत आत्माएं अपना पहरा जमाए हुई हैं.

सैन डिएगो, कैलिफोर्निया (न्यूयॉर्क) के एक एकांत स्थान पर स्थित वैले हाउस, जिसका निर्माण

थॉमस वैले ने 1857 के आसपास करवाया गया था. लेकिन जैसे ही थॉमस के बेटे की मृत्यु हुई इस घर में अचानक ही हादसों का सिलसिला शुरू हो गया. थॉम

स का बेटा सिर्फ 18 महीने का ही था जब उसे तेज बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया और इसी कारण वह इस दुनिया से चल बसा.

वैले परिवार को इस घर में आने से पहले ही यह लगता था कि कुछ तो है जो बहुत अजीब है, उन्हें इस बात का भी अंदेशा था कि इस मकान को रूहों ने अपनी चपेट

 में ले रखा है. स्थानीय लोगों ने कई बार उन्हें चेताया भी था कि जिस स्थान पर वो मकान बनाने जा रहे हैं वहां एक व्यक्ति की मौत हुई थी, लेकिन उन्होंने इस

बात पर विश्वास नहीं किया और मकान के निर्माण का काम जारी रखा और इसमें रहने भी आ गए. लेकिन उस मृत आदमी की रूह ने उन्हें हर समय परेशान किया.

रहे हैं.